मैं ज़िन्दगी का साथ निभाता चला गया
हर फ़िक्र को धुएँ में उड़ाता चला गया

इस सदाबहार गीत को आवाज़ दी है संगीत के सम्राट- मोहम्मद रफी ने जिन्हें दुनिया रफी साहब के नाम से पुकारते हैं।रफी साहब ने अपने जीवन में कुल मिलाकर 26,000 गानों को रिकॉर्ड किया है जो अपने में एक उपलब्धि है।
रफी साहब का जन्म 24 दिसंबर 1924,अमृतसर पंजाब में हुआ था और 31जुलाई 1980, को उन्होंने से दुनिया से अलविदा कर दिया।आज उनकी पुण्तिथि पर उनको याद करते हुए जानते हैं कुछ सुनी अनसुनी बातें।
रफी साहब ने ना केवल हिन्दी बल्कि अन्य कई भाषाओं में संगीत को आवाज़ दी थी
उन्हें 6 वार फिल्फेयर और 1 बार राष्ट्रीय पुरस्कार से नवाजा गया।
1967 में भारत सरकार द्वारा उन्हें पद्मा श्री पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया।
इन्हें शहंशाह ए तुर्रम भी कहा जाता था
आज भी लोग रफी के गानों को उतना ही पसंद करते है। हम भी देखते है रफी साहब के कुछ सदाबहार गीत जो लोगो के दिलो आज भी जिंदा हैं।

  • चौदहवीं का चांद हो(फिल्म – चौदहवीं का चांद)
  • ऐ गुलबदन (फिल्म – प्रोफेसर)
  • क्या हुआ तेरा वादा(फिल्म – हम किसी से कम नहीं)
  • दर्द – ए – दिल,दर्द – ए- ज़िगर (फिल्म – कर्ज)
  • मैंने पूछा चांद से(फिल्म – अब्दुल्लाह)